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आदिवासियों की जमीन पर देश का सबसे ज्यादा खनिज फिर भी इतने गरीब क्यों?

आदिवासियों की जमीन पर देश का सबसे ज्यादा खनिज फिर भी इतने गरीब क्यों?

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यह सोचने की बात है कि जिन आदिवासियों की जमीन पर देश का सबसे ज्यादा खनिज है, वे इतने गरीब क्यों हैं? आंदोलनकारियों को जेल में डाल दिया जा रहा है। अभी जो विस्थापन हो रहा है, वह विकास के नाम पर नहीं बल्कि लूट के नाम पर हो रहा है। 

 

आदिवासियों की तस्वीर

 

अलांयस फॉर जस्टिस एंड पीस के तत्वावधान में रविवार को राँची, मेन रोड स्थित होटल केन में लोकतंत्र की सुरक्षा विषय पर जन सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल ने कहा कि वर्तमान समय लोकतंत्र के लिए संकट का है। खुलेआम संविधान बदलने की कोशिश की जा रही है। आदिवासियों, दलितों, मुसलमानों पर प्रहार किये जा रहे हैं। आदिवासियों की पहचान को हिंदू के साथ जोड़ा जा रहा है। आदिवासियों की जिन जमीनों पर खनिज हैं, वहां से उन्हें उखाड़ फेंका जा रहा है। जनआंदोलनों को दबाया जा रहा है। चार से पांच हजार लोगों को झारखंड में जेल में डाल दिया गया है। अब स्थिति यह है कि लाल किला के रखरखाव का जिम्मा डालमिया कंपनी को दे दिया जा रहा है, जबकि लाल किला राष्ट्रीय धरोहर है। किसी सरकार को यह हक नहीं कि लाल किला को किसी प्राइवेट कंपनी को दिया जाये।

 

इससे पूर्व अलांयस फॉर जस्टिस एंड पीस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मौलाना डॉ तलहा नदवी ने कहा कि मुल्क के हालात बदल चुके हैं। मौजूदा केंद्र सरकार एक पार्टी नहीं, बल्कि पंथ की तरह काम कर रही है। किसान, मजदूर, आदिवासियों को दबाया जा रहा है। देश के एक प्रतिशत लोगों के पास सारी पूंजी है। ऐसे में मुल्क में जितने भी संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े लोग हैं, सबको इकट्ठा होना होगा। तसलीम रहमानी ने कहा कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं, पर उन्हें हिंदू में शामिल कर उनकी पृथक पहचान को खत्म किया जा रहा है।

 

प्रकाश  विप्लव ने कहा कि देश को हिंदू राष्ट्र में तब्दील करने का प्रयास हो रहा है। जो इसका विरोध करते हैं, उनकी हत्या करा दी जा रही है। गौरी लंकेश और कुलबर्गी की हत्याएं इसका प्रमाण है। ऐसी ताकतों को मजबूत करने में कुछ राजनीतिक दलों की भी भूमिका है।

 

आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि झारखंड में न तो पीस है न जस्टिस। जो लोग सत्ता पर हैं, उनकी नीयत ठीक नहीं है। इसके विरोध में अगर कोई आवाज उठाता है, तो उसका जेल जाना तय है। जनसम्मेलन को अनिल अंशुमन, प्रो जावेद, देशबंधु, नदीम खान, रामदेव विश्वबंधु सहित अन्य ने भी संबोधित किया।

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