श्रेष्ठता की कसौटी पर साक्षर सत्ता बनाम कम साक्षर सत्ता को कसेगी जनता

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श्रेष्ठता की कसौटी

श्रेष्ठता की कसौटी पर ही कसेगी जनता साक्षर सत्ता बनाम कम साक्षर सत्ता को  

झारखंड ग़रीब व कम साक्षर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने का तमगा लिए अपनी नयी पहचान गढ़ने को आतुर है। प्रदेश का सत्य यह भी रहा है, पिछली पढ़ी लिखी सरकार हर आयाम में इतनी विफल रही कि जनता को इन्हें बदलना ही सही लगा। विडंबना है कि संविधान की शपथ लेकर राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में बैठी पिछली सरकार, आज की सत्ता को केवल कम साक्षर बता ही घेर पा रही है। ऐसे में सवाल यह भी हो सकता है कि क्या किसी के अनुभव, समझ, काम, कार्यशैली व आकांक्षाओं को बिना आंके आरोप लगाना प्रासंगिक हो सकता है?

दूसरा सवाल यह भी हो सकता है कि संविधान की शपथ लेकर पढ़ी लिखी लेकिन गैरजिम्मेदार सत्ता, जहाँ संवैधानिक संस्थायें बेमानी लगे, कहाँ तक प्रासंगिक हो सकता है। ऐसे में लोकतंत्र के नाम दिया जाने वाला हर परिभाषा संदेहास्पद हो जनता को डराती है। इन्हीं परिस्थितियों के बीच कम साक्षर सत्ता ने पिछली साक्षर सत्ता के 53 दिनों की तुलना में महज 29 दिनों में ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर झारखंड के प्रति उनके सरोकारों का संदेश है। जिसके छटपटाहट में विपक्ष केवल इतना भर कह पायी कि वर्त्तमान सरकार के मंत्री कम पढ़ी लिखी है। ऐसे में जनता ही साक्षर सत्ता बनाम कम साक्षर सत्ता को श्रेष्ठता की कसौटी कस सकती है।

मसलन, नयी सरकार के मंत्रियों ने भी कार्यभार संभालते हुए राज्य की जनता को एक टीम की भांति क्या संदेश दिए – स्कूली शिक्षा व साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो ने झारखंड के 65 हजार पारा शिक्षकों के मानदेय की फाइल पर हस्ताक्षर किये। वित्त सह खाद्य उपभोक्ता मंत्री रामेश्वर उरांव ने तीन लाख फर्जी राशन कार्ड को रद्द करने का निर्देश दिया। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कल्याण सह परिवहन मंत्री चम्पई सोरेन ने कल्याण विभाग के 143 विद्यालयों को मॉडल बनाने का निर्देश दिया। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने गाँवों को सड़क व पुल-पुलिया से जोड़ने को प्राथमिकता दी है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता डॉक्टरों के साथ मिलकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुखद परम्परा की शुरुआत करने की बात कही। श्रम मंत्री सत्यानन्द भोक्ता पलायन जैसे मुद्दे को रोकने जोर दे रहे हैं। वहीँ कृषि मंत्री बादल ने किसानों की स्थिति को सुधारने का भरोसा दिया है। ऐसे में जनता श्रेष्ठता की कसौटी पर कसे की कौन सी सत्ता श्रेष्ठ।

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