अंबेडकर आवास योजना

 अंबेडकर का नाम चुनाव में फिर से भुनाने के प्रयास में भाजपा  

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बाबा साहेब अंबेडकर के सहारे भाजपा झारखण्ड के चुनावी बैतरनी पार करने की तैयारी में 

किसी चिंतक ने कहा है कि बहस का मक़सद हार या जीत नहीं होता है, बल्कि विचारों को विकसित करना होता है। जब बहस अपनी कोर बचाने के मक़सद से किया जाता हैं, तो एक कुतर्क को छुपाने के लिए दर्जनों कुतर्क गढ़ने पड़ते हैं, झूठ बोलने पड़ते हैं, बातें बदलनी पड़ती हैं और कठदलीली करनी पड़ती है। यही प्रक्रिया आगे बढ़़कर बौद्धिक बेईमानी में भी तब्दील हो जाती है झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुबर जी भी बस अब यही करते नजर आ रहे हैं, बस पिछले जुमले को छुपाने के लिए चंद और जुमले का बरसात कर देना। इनका यह प्रयास लोक कल्याणकारी कम और अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष अपनी सम्मान की रक्षा का प्रयास ज्यादा प्रतीत होता है। 

झारखंड में मुख्यमंत्री जी ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर भीमराव अंबेडकर आवास योजना इस राज्य के विधवाओं के लिए शुरू किया था। लेकिन प्रभात ख़बर, 2017 की रिपोर्ट बताती है कि इस योजना के तहत राज्य भर में विधवाओं मिलने वाले 11000 आवास में केवल 69 आवास ही बन सके थे, जो कि महज 0.62 फीसदी ही था। लेकिन सरकार बहादुर ने उसका लेखा जोखा देने के बजाय अब फिर से 4700 आवास बनाने का जुमला उछाल दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि हर जिले में 250 आवास अतिरिक्त बनाये जायेंगे। अब आप ही तय करें इनके इस जुमले को क्या कहा जाए!   

अब इनका कहना है कि इस योजना के तहत इन्होंने 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले गरीब व आवास विहीन विधवा को शामिल किया है। साथ ही वह महिला जिनके पास एक कमरे का कच्चा मकान है और मासिक आय 5000 रुपये है। योजना के तहत पहाड़ी या आइएपी जिले में प्रत्येक मकान 1.30 लाख रुपये से  बनाये जायेंगे। जबकि मैदानी भाग में 1.20 लाख रुपये से प्रत्येक आवास बनेंगे। मसलन, रघुबर सरकार ने दलितों को रिझाने के लिए चाल तो दी है, लेकिन अब देखना यह है कि बाबा साहब के अनुयाईयों पर खुल कर हमला करने वाली सरकार पर यह समुदाय कितना विश्वास दिखाती है। साथ ही वक़्त यह भी बतायेगा यह अपने कार्यकाल में मकान बनाते भी हैं यह भी जूमला साबित होगा।  

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