लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में अभिभावकों ने फीस भरने को लेकर जताई चिंता, सरकार से गुहार

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 07 Apr 2020 06:35 AM IST

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भारत में लॉकडाउन के दौरान कई स्कूलों द्वारा अभिभावकों से बच्चों की फीस भरने को कहा गया है। हाल ही में दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां, दो अभिभावकों ने इस पर प्रश्न उठाए हैं। 

दरअसल, वास्तुशिल्प उद्योग से जुड़े शुभम भारद्वाज का व्यवसाय लॉकडाउन के दौरान धीमा पड़ गया है और उनके बच्चों के स्कूल से दो महीने की फीस भरने का नोटिस आ गया है। इसी तरह तृषा भाटिया ने स्कूल परिसर को देर से अदा करने के संबंध में जानकारी  मांगी है क्योंकि लॉकडाउन के कारण उन्हें इस महीने 22 प्रतिशत कम वेतन मिला है। 

शुभम और तृषा उन अभिभावकों में से हैं जो इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि सरकार उन्हें फीस को लेकर कुछ राहत उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, स्कूलों का कहना है कि बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं जारी हैं और उन्हें भी शिक्षकों का वेतन देना है।

अभिभावकों का यह भी कहवा है कि स्कूलों द्वारा तैराकी, घुड़सवारी और अन्य खेल एक्टिविटी पर कई तरह के शुल्क लगाए गए हैं, जो कि वास्तव में लॉकडाउन के कारण आयोजित ही नहीं हो पा रहे हैं।

वहीं, गुड़गांव और नोएडा में अभिभावकों को इस संबंध में राहत मिल गई है। नोएडा प्रशासन ने रविवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा स्थित स्कूलों को आदेश दिया कि वे लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों पर फीस देने का दबाव न बनाएं। हरियाणा सरकार ने भी ऐसा ही एक आदेश पिछले सप्ताह जारी किया था। भारद्वाज ने कहा, ‘जब गुड़गांव और नोएडा में ऐसा हो सकता है तो दिल्ली के स्कूल ऐसा क्यों नहीं कर सकते। 

लॉकडाउन के दौरान राहत पैकेज की घोषणा कर सरकार को इस समस्या का निदान करना चाहिए।’ दिल्ली अभिभावक संघ ने भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर फीस पर अभी स्थगन लगाने की मांग की है।

भारत में लॉकडाउन के दौरान कई स्कूलों द्वारा अभिभावकों से बच्चों की फीस भरने को कहा गया है। हाल ही में दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां, दो अभिभावकों ने इस पर प्रश्न उठाए हैं। 

दरअसल, वास्तुशिल्प उद्योग से जुड़े शुभम भारद्वाज का व्यवसाय लॉकडाउन के दौरान धीमा पड़ गया है और उनके बच्चों के स्कूल से दो महीने की फीस भरने का नोटिस आ गया है। इसी तरह तृषा भाटिया ने स्कूल परिसर को देर से अदा करने के संबंध में जानकारी  मांगी है क्योंकि लॉकडाउन के कारण उन्हें इस महीने 22 प्रतिशत कम वेतन मिला है। 

शुभम और तृषा उन अभिभावकों में से हैं जो इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि सरकार उन्हें फीस को लेकर कुछ राहत उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, स्कूलों का कहना है कि बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं जारी हैं और उन्हें भी शिक्षकों का वेतन देना है।

अभिभावकों का यह भी कहवा है कि स्कूलों द्वारा तैराकी, घुड़सवारी और अन्य खेल एक्टिविटी पर कई तरह के शुल्क लगाए गए हैं, जो कि वास्तव में लॉकडाउन के कारण आयोजित ही नहीं हो पा रहे हैं।

वहीं, गुड़गांव और नोएडा में अभिभावकों को इस संबंध में राहत मिल गई है। नोएडा प्रशासन ने रविवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा स्थित स्कूलों को आदेश दिया कि वे लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों पर फीस देने का दबाव न बनाएं। हरियाणा सरकार ने भी ऐसा ही एक आदेश पिछले सप्ताह जारी किया था। भारद्वाज ने कहा, ‘जब गुड़गांव और नोएडा में ऐसा हो सकता है तो दिल्ली के स्कूल ऐसा क्यों नहीं कर सकते। 

लॉकडाउन के दौरान राहत पैकेज की घोषणा कर सरकार को इस समस्या का निदान करना चाहिए।’ दिल्ली अभिभावक संघ ने भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर फीस पर अभी स्थगन लगाने की मांग की है।

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