दिल्ली के कंटेन्मेंट इलाकों में स्थितियां अलग, सख्त पहरों और कड़े सवालों के बीच जिंदगी जी रहे हैं लोग

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दिल्ली के कंटेन्मेंट इलाकों में स्थितियां अलग, सख्त पहरों और कड़े सवालों के बीच जिंदगी जी रहे हैं लोग

दिल्ली के तीन कंटेन्मेंट जोन में रहने वाले लोगों के लिए परिस्थितियां अलग हैं

नई दिल्ली:

दिल्ली के तीन कंटेन्मेंट जोन में रहने वाले लोगों के लिए परिस्थितियां अलग हैं. वैसे तो पूरे देश में लॉक़डाउन लागू है लेकिन कुछ हॉटस्पॉट ऐसे हैं जहां हालात ज्यादा नाजुक हैं. इनमें से तीन कंटेन्मेंट जोन दिल्ली के हैं. पहला दिलशाद गार्डन, दूसरा निजामुद्दीन इलाका और तीसरा साउथ दिल्ली का मोतीबाग एरिया. इन इलाकों की तरफ ज्यादा रास्ते या तो बंद है या फिर उन इलाकों से गुजरने के दौरान आपको पुलिस के कई कड़े सवालों और कई तरह की पड़ताल से गुजरना होगा. इन जगहों की तरफ जाने वाले रास्तों को बड़े-बड़े ट्रकों से बंद कर दिया गया है और ड्रोन की मदद से पूरे इलाके पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार उन इलाकों को कंटेन्मेंट घोषित किया जाता है, जहां ज्यादा संख्या में लोग संक्रमित मिल रहे हैं. कंटेन्मेंट घोषित करने के पीछे कारण यह होता है कि ताकि यहां कम से कम लोग आए और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. कंटेन्मेंट जोन्स की परिधि कई पैमानों पर निर्धारित होती है, मसलन कि वहां कितने संक्रमित मिले,उन्होंने कितने लोगों से मुलाकात की, जनसंख्या घनत्व वगैरह-वगैरह. और इन पैमानों के आधार पर ही वहां तैनात सुरक्षा व स्थास्थ्य कर्मी नियम व दूसरी जरूरी चीजें तय करते हैं. दिल्ली के तीनों कंटेन्मेंट इलाकों के आस-पास के एक किलोमीटर की परिधि की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.  

दिल्ली स्टेट कैंसर संस्थान, पर दो डॉक्टरों और 16 नर्सों में कोरोना वायरस का संक्रमण की पुष्टि हुई. ये संक्रमण किसी मरीज़ से नहीं बल्कि एक डॉक्टर परिवार से हुआ जो यूके से लौटा है. अब अस्पताल के 45 स्टाफ को क्वॉरंटीन किया गया है. अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि 19 लोगों के सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए हैं. 

दिलशाद गार्डन को उस वक्त कंटेन्मेंट घोषित किया गया जब सऊदी अरब से लौटी एक महिला में कोरोनावायर की पुष्टि हुई. महिला की वजह से 8 और लोग इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ गए.  सेक्टर एल को पूरी तरह से सील कर दिया गया है जहां कुल 9 मामले अब तक मिल चुके हैं. दिलशाद गार्डन में दाखिल होने के लिए 11 रास्ते हैं लेकिन ज्यादातर को बंद रखा गया है. सिर्फ दो रास्तों को खुला रखा गया है जहां से स्थानीय निवासी गुजर सकते हैं लेकिन वहां भी उन्हें कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है. दिलशाद गार्डन इलाके में दुकान लगाने वाले विजय कुमार का कहना है कि यहां इस वक्त सभी चीजें उपलब्ध हैं लेकिन जो ट्रक सामान पहुंचाने के लिए आते थे वो अब बहुत कम आ रहे हैं. 

निजामुद्दीन में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं, तबलीगी जमात के जरिए अब तक कोरोनावायरस संक्रमण के 300 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं लिहाजा इसे पूरी तरह से बंद रखा गया है और बड़े पैमाने पर यहां सैनिटाइजेशन का काम चल रहा है. 

हांलाकि दक्षिण मोती बाग़ में सिर्फ एक पॉजिटिव केस है, वो भी यहां रहने वाला एक व्यक्ति जो एम्स में सफ़ाई कर्मचारी है लेकिन वो जहां रहता है वहीं आसपास बड़ी संख्या में लोग रहते हैं इसलिए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और पूरे इलाके को कंटेन्मेंट ज़ोन बना दिया है. ट्रकों के ज़रिए पांच में चार रास्तों को बंद कर दिया गया है. इस इलाके के एक दुकानदार  उदय सिंह बताते हैं कि कोरोनावायरस का पहला मामला सामने आने के बाद से ही लोगों ने मंडी की जगह को बदल दिया, अब वह 500 मीटर और आगे लगाई जाती हैं. उन्होंने बताया कि सुबह और शाम दोनों वक्त अधिकारी दौरे के लिए आते हैं सिर्फ जरूरी सामानों की चुनिंदा दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई है. 

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का मानना है कि आने वाले समय में स्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं. लिहाजा हम इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं, रैपिड किट्स हासिल करने के साथ ही इन कंटेन्मेंट इलाकों में प्राथमिकता के साथ जांच की जाएगी. 

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